ढांचागत सुविधाओं का टोटा झेल रहे जिले के सेब काश्तकार फल पौध, दवा और पेटी ही नहीं बल्कि पेड़ों की कटाई छंटाई के लिए भी हिमाचल प्रदेश पर निर्भर हैं। पहली बार कृषि विज्ञान केंद्र चिन्यालीसौड़ द्वारा स्थानीय युवाओं को फल वृक्षों की कटिंग, प्रूनिंग, लेयरिंग के गुर सिखाए जा रहे हैं।
सुक्की के मोहन सिंह, धराली के महेश पंवार, हर्षिल के माधवेंद्र रावत आदि काश्तकारों का कहना है कि उन्हें स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित कर्मी नहीं मिल पाते। हिमाचल से आए प्रशिक्षित कर्मियों को छोटे बागीचे में 9 हजार और बड़े बागीचे में 18 से 20 हजार रुपये मजदूरी देनी पड़ती है। कृषि विज्ञान केंद्र चिन्यालीसौड़ के प्रभारी डा. पंकज नौटियाल ने बताया कि इस बार केंद्र में जिले के युवाओं को सहायक माली और कृषि प्रसार सेवा प्रदाता का दो सौ घंटे का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र में ही बड़ी संख्या में पद रिक्त हैं। इन प्रशिक्षित युवाओं से केंद्र को भी सपोर्ट मिलेगा और बागीचों में उन्हें स्वरोजगार के अवसर भी मिलेंगे।